Arattai app

Arattai, Zoho has developed its own messaging app Made In India

Aratai Made In India

मेड इन इंडिया के तहत भारत के लोकप्रिय निर्माता ज़ोहो ने व्हाट्सएप को टक्कर देने के लिए अपना खुद का मैसेजिंग ऐप अराटाई ‘Arattai‘ विकसित किया है
भारत के चेन्नई स्टेट मैं स्थित कंपनी ज़ोहो अराटाई नामक एक उपभोक्ता मैसेजिंग ऐप को डेवेलोप किया है,

अराटाई एक तमिल शब्द है जिसका अर्थ है गपशप। अर्थात गपशप करने के लिए एक प्लेटफार्म।

भारत मैं स्थित ज़ोहो कॉर्पोरेशन एक बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनी है जो सॉफ्टवेयर विकास में बहुत बड़ा नाम रखती है। जिसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है।

रिसेंटली कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्रीधर वेम्बू ने ट्वीट किया कर कहा था कि ये ऐप स्टोर पर उपलब्ध अराटाई का वर्तमान संस्करण दोस्तों और

परिवार के लिए अभी परीक्षण संस्करण है और कुछ हफ़्तों के बाद इसके आधिकारिक लॉन्च की योजना बनाई जा रही है।

उन्होंने ये भी कहा की मेड इन इंडिया के तहत सोशल मीडिया पर मची हलचल ने उन्हें अराटाई के बारे में ट्वीट करने के लिए मजबूर किया है। इस नए इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप को

लेकर उनको ट्वीट करना पड़ा।

Aratai, Zoho has developed its own messaging app Made In India

Aratai Made in India
Aratai Made in India

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ज़ोहो के मार्केटिंग उपाध्यक्ष प्रवल सिंह का कहना है की एक कंपनी के रूप में, हम अपने उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता को सुरक्षित रखने और किसी भी डेटा को तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं करने पर पूरी गोपनीयता रखी गयी हैं और उन्होंने ये भी कहा है के उनका कोई विज्ञापन राजस्व मॉडल भी नहीं है। अराटाई डेटा को एक घरेलू कंपनी के रूप में भारत में ही संग्रहीत किया गया है।

अराटाई की गोपनीयता नीति के अनुसार, ऐप प्रोफ़ाइल नाम, फ़ोन नंबर, देश कोड, पता, प्रोफ़ाइल चित्र (वैकल्पिक) और संपर्क (वैकल्पिक) सहित सम्पूर्ण डेटा एक ही जगह इंडिया मे ही स्टोर किया गया है। और उपयोगकर्ता की बिना अनुमति के ये डेटा किसी के साथ साझा या प्रकट नहीं किया जायेगा है।
जोहो के इस कदम की सराहना करते हुआ मैसेजिंग ऐप उपयोगकर्ताओं ने पुरे इंटरनेट पर व्हाट्सएप कि जगह ‘मेड इन इंडिया’ विकल्प पर पूरी तरह से जोर दिया जा रहा है। अब से व्हाट्सप्प कि जगह ‘मेड इन इंडिया’ मैसेजिंग ऐप ‘अराटाई’ ‘Arattai‘ का उपयोग किया जायेगा।

कुछ लोगों का तो ये भी मानना ​​है कि विदेशीयो कि बड़ी तकनीकी कंपनियों ट्विटर, यूट्यूब, और फेसबुक के नियंत्रण को कम करने के लिए एक ऐसा ही स्वदेशी ‘मेड इन इंडिया’ कम्पनिया विकसित कि जानी चाहिए।

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *